Tuesday, 15 May 2012

आदिवासी स्वर और नई शताब्दी




Book : Aadivasi Swar Aur Nai Shatabadi
Editor : Ramanika Gupta
Publisher : Vani Prakashan
Price :
`350(HB)
ISBN : 81-7055-908-1
Total Pages :  323
Size (Inches) :
5.75X8.75
Category  :  Dalit Literature


पुस्तक के सन्दर्भ में राजनीतिक टिप्पणीकार और स्तम्भ लेखक राजकिशोर के विचार......
स्त्रियों और दलितों का पक्ष लेने वाले लेखकों-सम्पादकों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसका एक कारण यह है कि इस क्षेत्र में नेतृत्व का स्थान लगभग खाली है । पर आदिवासियों को कोई नहीं पूछता क्यों वे राजधानियों में सहज सुलभ नहीं होते । उनकी सुध लेने के लिए उनके पास जाना पड़ेगा-कष्ट उठा कर। इसलिए वे उदाहरण देने और इतिहास की बहसों में लाने के लिए ही ठीक है ।  इस दृष्टि से रमणिका गुप्ता की तारीफ होनी चाहिए कि 'आदिवासी स्वर और नई शताब्दी' की थीम पर एक उम्दा कृति दी है विशेषता यह है कि एक नीतिगत फैसले के तहत हमने इस अंक में केवल वही रचनाएँ ली हैं जो आदिवासी लेखकों द्वारा ही लिखी गई हैं । फलत:आदिवासी मानसिकता की विभिन्न  मुद्राओं  को समझने का अवसर मिलता है । यह देख कर खुशी नहीं होती कि दलित साहित्य की तरह नए आदिवासी साहित्य में आक्रोश ही मुख्य स्वर बना हुआ है । जहाँ भी अन्याय है, आक्रोश का न होना स्वास्थ्यहीनता का लक्षण है । लेकिन साहित्य के और भी आयाम होते हैं, यह क्यों भुला दिया जाये ? 

संपादक के सन्दर्भ में.....
रमणिका गुप्ता का जन्म 22 अप्रैल, 1930 सुनाम (पंजाब) में हुआ हिन्दी की परिचित कथाकार,कवयित्री एवं चिंतक रमणिका गुप्ता झारखण्ड के छोटानागपुर में मज़दूरों, दलितों, आदिवासियों एवं महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्षरत रही हैं सम्प्रति वह प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका 'युद्धरत आम आदमी' की संपादक हैं