Tuesday, 22 May 2012

दो नोबेल पुरस्कार विजेता कवि



वाणी प्रकाशन अपने पाठकों को एक साहित्य से दूसरे साहित्य से जोड़ने की प्रक्रिया में संलग्न है । अनुवाद एक ऐसा माध्यम है जिससे एक संस्कृति दूसरी संस्कृति से मिलती है, जिससे साहित्य का आदान-प्रदान होता है । वाणी प्रकाशन का उद्देश्य है कि पूरी दुनिया में लोग हिन्दी साहित्य को जानें ।  लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि हम अन्य राष्ट्रों के साहित्य को भी जानें समझें । आपके समक्ष एक पुस्तक के माध्यम से, दो नोबेल पुरस्कार विजेता कवि जिसमें एक काव्य संकलन 'मेरे चेहरे के नुकूश', जिसे,चेस्लाव मीलोष ने लिखा है । दूसरा काव्य संकलन 'किसी को हटाना होगा यह मलबा' इसे,विस्वावा शिम्बोर्स्का ने लिखा है । प्रस्तुत है ।

Book : Do Nobel Puraskar Vijeta Kavi
            Mere Chehre Ke Nukoosh : Czeslaw Milosz
            Kisi Ko Hatana Hoga Yah Malaba : Wislawa Szymborska
Author  :
Czeslaw Milosz And Wislawa Szymborska
Translator  : Vishnu Khare  
Publisher : Vani Prakashan
Price :
`125(HB) 
ISBN : 81-7055-828-x
Total Pages : 103
Size (Inches) :
5.75X8.75
Category  :  Poetry


पुस्तक के सन्दर्भ में.......
मेरे चेहरे के नुकूश : चेस्लाव मीलोष, के काव्य 'प्रेम' पृष्ठ संख्या 22 की कुछ पक्तियाँ आप के सामने प्रस्तुत हैं :
प्रेम का अर्थ है अपने को उस तरह देखना सीखना
जैसे कोई दूर की चीजों को देखता है
क्योंकि तुम अनेक के बीच सिर्फ एक वस्तु हो

और जो भी उस तरह देखता है अपने हृदय को,
बिना जाने, कई रोगों से अच्छा करता है -
एक पक्षी और एक वृक्ष उससे कहते हैं : सखा । ...........
किसी को हटाना होगा यह मलबा : विस्वावा शिम्बोर्स्का के काव्य 'एक प्राचीन प्रस्तर युगीन प्रसवन-प्रतिमा' पृष्ठ संख्या 79 की कुछ पक्तियाँ...
बड़ी माता का चेहरा नहीं है
बड़ी माता को चेहरे की जरूरत क्यों होगी ।
चेहरा शरीर के तईं वफादार नहीं रह सकता ।
चेहरा शरीर को परेशान करता है, वह अदैवीय है ।
बड़ी माता की शकल उसका फूलता हुआ पेट है
जिसके बीच में एक अंधी नाफ़ है । .......

लेखकों के सन्दर्भ में.....
चेस्लाव मिलोश

कवि, आलोचक, उपन्यासकार, अनुवादक चेस्लाव मीलोष का जन्म 1911 में लिथुआनिया में हुआ ।  इन्हें साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार 1980 में दिया गया । इनकी काव्यकृतियाँ : पालालगे समय में कविता, तीन जाड़े, दिन का उजाला, कविता पर प्रबन्ध, नामहीन शहर, जहाँ सूरज उगता और जहाँ अस्त होता है, मोती के बारे में स्तुति, अप्राप्य पृथ्वी, वृत्तान्त, नदी किनारे, गली का कुत्ता, यह, दूसरा स्थान, आरफियस और यूरीडीसी । 

अन्य पुस्तकें : क़ैदी दिमाग़, सत्ता हथियाते हुए, इस्सा की घाटी, सुपरिचित यूरोप, महाद्वीप, निजी कर्त्तव्य, उलरो का देश, मातृभूमि की खोज में, मीलोष का कखग । 
विश्व की अनेक भाषाओं में अनूदित मीलोष को कैलिफोर्निया, मिशीगन, हार्वर्ड, लूथ्लीन, याग्येलोन्यन, वीतोल्द महान, रोम, बोलोन आदि अनेक विश्वविद्यालयों  द्वारा मानद उपाधियों से विभूषित किया गया है । उन्हें गुगेनहाइम नोइश्टाड पुरस्कार, लिथुआनिया का सर्वोच्च पुरस्कार आदि अनेक अलंकरण मिले हैं । वर्तमान में पोलैण्ड की सांस्कृतिक राजधानी क्रोकूव में मीलोष इन दिनों रहते हैं । 



विस्वावा शिम्बोर्स्का
पोलिश कविता में विस्वावा शिम्बोर्स्का का वही स्थान और सम्मान है जो सम्मान हिन्दी में महादेवी का है । उनका पहला कविता-संग्रह 1952 में प्रकाशित हुआ था ।  1996 में उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया । चेस्लाव मीलोष की तुलना में उन्होंने कम कविताएँ लिखी हैं किन्तु स्वीडी अकादमी ने उनकी कला को 'सशक्त' बताते हुए उसके वैदग्ध्य, उल्लास, परानुभूति और आविष्कार कौशल को पहचाना है ।  अपनी कुशाग्र रचनाशीलता, पोलिश भाषा पर विलक्षण अधिकार और मानव अस्तित्व के मूलभूत मसलों पर बेबाक टिप्पणियों के कारण शिम्बोर्स्का पोलैंड की सर्वाधिक लोकप्रिय कवयित्री बन गयी हैं ।    

अनुवादक के सन्दर्भ में.....
विष्णु खरे

छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश में जन्मे कवि, आलोचक, पत्रकार, फिल्म समीक्षक विष्णु खरे पिछले 41  वर्षों से मुख्यत: अंग्रेजी और अंशत: जर्मन से हिन्दी में कविता का अनुवाद कर रहे हैं और महाकाव्यों से लेकर महाकवियों तक के अनुवाद कर चुके हैं ।