Wednesday, 25 April 2012

मुन्नी मोबाइल


Book :  Munni Mobile
Author : Pradeep Saurabh
Publisher : Vani Prakashan
Price : Price :` 350 (HB)
 
ISBN : 978-93-5000-055-7
Total Pages :  156
Size (Inches) :   5.75X8.75
Category  : Fiction, Political

पुस्तक के संदर्भ में प्रख्यात कथाकार, संस्मरण लेखक रवीन्द्र कालिया के विचार......
'मुन्नी मोबाइल' समकालीन सच्चाइयों के बदहवास चेहरों की शिनाख्त करता उपन्यास है धर्म, राजनीती, बाजार और मीडिया आदि के द्वारा सामाजिक विकास की प्रक्रिया किस तरह प्रेरित व प्रभावित हो रही है, इसका चित्रण प्रदीप सौरभ ने अपनी मुहावरेदार रवाँ-दवाँ भाषा के माध्यम से किया है प्रदीप सौरभ के पास नये यथार्थ के प्रमाणिक और विरल अनुभव हैं इनका कथात्मक उपयोग करते हुए उन्होंने यह अत्यंत दिलचस्प उपन्यास लिखा है मुन्नी मोबाइल का चरित इतना प्रभावित है कि स्मृति में ठहर जाता है'

पुस्तक के संदर्भ में प्रख्यात लेखिका मृणाल पांडे के विचार.....

'लेखक-पत्रकार आनंद भारती की व्यासपीठ से निकली 'मुन्नी मोबाइल' की कथा पीछले तीन दशकों के भारत का आईना है । इसकी कमानी मोबाइल क्रांति से लेकर मोदी (नरेंद्र) की भ्रांति तक और जातीय सेनाओं से लेकर लंदन के आप्रवासी भारतीयों के जीवन को माप रही है । दिल्ली के बाहरी इलाके की एक सीधीसादी घरेलू नौकरानी का वक्त की हवा के साथ क्रमश: एक दबंग और सम्पन्न स्थानीय 'दादा' बन जाना और फिर लड़कियों की बड़ी सप्लायर में उसका आखरी रूपांतरण, एक भयावह कथा है, जिसमें हमारे समय की अनेक अकथनीय सच्चाइयाँ छिपी हैं। मुन्नी के सपनों की बेटी रेखा चितकबरी पर समाप्त होने वाली यह गाथा, खत्म होकर भी ख़त्म कहाँ होती है?'

पुस्तक के संदर्भ में सुप्रसिद्ध आलोचक सुधीश पचौरी के विचार.....
'मुन्नी मोबाइल' एकदम नई काट का, एक दुर्लभ प्रयोग है ! प्रचारित जादुई तमाशों से अलग, जमीनी, धड़कता हुआ, आसपास का और फिर भी इतना नवीन कि लगे आप इसे उतना नहीं जानते थे । इसमें डायरी, रिपोर्टिंग, कहानी की विधाएँ मिक्स होकर ऐसे वृत्तान्त का रूप ले लेती हैं जिसमें समकालीन उपद्रवित, अति उलझे हुए उस रौरव यथार्थ का चित्रण है, इसे पढ़कर आप गोर्की के तलछटिय जीवन के जीवंत वर्णनों और ब्रेख्त द्वारा जर्मनी में हिटलर के आगाज को लेकर लिखे 'द रेसिस्टीबिल राइज ऑफ़ आर्तुरो उई' जैसे विख्यात नाटक के प्रसंगों को याद किये बिना नहीं रह सकते ! पत्रकारिता और कहानी कला को मिक्स करके अमरीका में जो कथा-प्रयोग टॉम बुल्फ ने किये हैं प्रदीप ने यहाँ किये हैं।'


लेखक के  संदर्भ में.....

प्रदीप सौरभ का जन्म कानपुर, उत्तरप्रेदश में हुआ लम्बे समय तक इलाहाबाद में गुजारा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. किया जनआन्दोलनों में हिस्सा लिया कई बार जेल गये इनका निजी जीवन खरी-खोटी हर खूबियों से लैस रहा कब, कहाँ और कितना जिया,इसका हिसाब-किताब कभी नहीं रखा कई नौकरियाँ करते-छोड़ते दिल्ली पहुँच कर साप्ताहिक हिंदुस्तान के सम्पादकीय विभाग से जुड़े गुजरात दंगों की रिपोर्टिंग के लिए पुरस्कृत हुए पंजाब के आतंकवाद और बिहार के बंधुआ मजदूरों पर बनी फिल्मों के लिए शोध कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 'मुन्नी मोबाइल' पर शोध