Friday, 6 April 2012

दलित दृष्टि

 
Book : Dalit Drashti
Author : Gail Omvet
Translator(s)  : Ramnika Gupta & Aqeel Qess
Publisher : Vani Prakashan
Price : ` 250(HB)
ISBN : 978-93-5000-726-6
Total Pages :  111
Size (Inches) :   5.75X8.75
Category  : 
Dalit Leterature/Criticism

 पुस्तक के संदर्भ में .....
भारतीय वामपंथियों ने सांस्कृतिक तथा प्रतीकात्मक मुद्दों पर समुचित ध्यान ही नहीं दिया है/ कहा जा सकता है कि उन्होंने भारतीय संस्कृति के ब्राह्मणवाद के वर्चस्ववादी अर्थ तथा स्वरूप से आँखें चुराईं/ दरअसल यह लड़ाई तो दलित जाति-विरोधी आन्दोलनों तथा कुछ हद तक हाल के दशकों के इतर सामाजिक आन्दोलनों ने लड़ी है/ हिन्दू धर्म से मुठभेड़ के इस इतिहास से सीख लेने का समय आ गया है/ ओमवेट दिखाती हैं  कि किस प्रकार दलित आन्दोलनों के विभिन्न पक्षों ने दलित पर अत्याचार-उत्पीड़न के निमित्त खड़ी की गयी संरचनाओं और दलित-उध्दार की आधारभूत शर्तों को देखने-परखने के नये मार्ग प्रशस्त किये हैं/ जोतिबा फुले ने वर्ण व्यवस्था को हिन्दू धर्म की आत्मा के रूप में देखा/ उत्पीड़न की जिस संस्कृति को यह धर्म पोषित करता है और जिस नृशंस दासता को यह स्वीकार है, उन्होंने उसका पर्दाफाश करने का प्रयास किया/
इस पुस्तक में ओमवेट ने हिन्दू धर्म को पितृसत्तावादी विचारधारा करार दिया और ब्राह्मणवादी पाठ में निहित पारंपरिक नैतिकता पर सवाल खड़े किये / उन्होंने इन मूल-पाठों को स्त्री-उत्पीड़न तथा पुरुषसत्तावादी दबदबे की जड़ माना/
पुस्तक में ओमवेट की बहस दो स्तरों पर चलती है/ पहले स्तर पर वे दलित आन्दोलन के विभिन्न चरणों, उन आन्दोलनों की आकांक्षाओं और आदर्शों, धर्म, संस्कृति और सत्ता के अंत: सम्बन्ध, जाति, लिंग और वर्ग-उत्पीड़न के मध्य सम्बन्ध तथा भाषा और पहचान के संबंधों के सन्दर्भ  में दलितों की समझ की विवेचना करती  हैं / दूसरे स्तर पर वे दलित उध्दार के विषय में अपना दृष्टिकोण सामने रखती है / विभिन्न दलित विचारधाराओं की चर्चा में लेखिका की आवाज़ सुना जा सकता है /  यह पुस्तक मान्यताओं और वर्गों को, जिन्हें हम बिना जांचे-परखे सही मान लेते हैं, चुनौती देगी / यह हमें इतिहास की अपनी समझ पर पुनर्विचार करने का आग्रह करेगी /


लेखिका के सन्दर्भ में .....
गेल ओमवेट गेल ओमवेट नये सामाजिक आन्दोलनों,विशेषतया नारी तथा किसान आंदोलनों से सम्बन्ध संगठनों के साथ जुडी हुई प्रसिध्द विदुषी के रूप में जानी जाती हैं /  कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से पीएच.डी.प्राप्त सुश्री ओमवेट 1982 से भारत की नागरिक हैं /  सत्तर के दशक से ही जाति-विरोधी अभियानों में वे सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं/ उन्होंने वर्ण, जाति तथा लिंग सम्बंधित विषयों पर कई गंभीर पुस्तकें तथा लेख लिखे हैं, जिसमें 'रिइनवेनिटंग रेवाल्यूशन : न्यू सोशल मूवमेंट्स इन इंडिया,(1993) तथा ' दलित वर्ग एंड डेमोक्रेटिक रेवाल्यूशन, (1994) चर्चित है/ लिंग-भेद, वातावरण तथा ग्राम विकास की विशेषज्ञ समाजशास्त्री  के रूप में लाभप्रतिष्ठ सुश्री गेल ओमवेट महाराष्ट्र के कासे गाँव में रहती हैं /

अनुवादक के संदर्भ में..
हिन्दी की परिचित कथाकार,कवियत्री एवं चिंतक रमणिका गुप्ता झारखण्ड के छोटानागपुर में मज़दूरों, दलितों, आदिवासियों एवं महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्षरत रही हैं/ सम्प्रति वह प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका 'युध्दरत आम आदमी' की संपादक हैं/