Tuesday, 3 April 2012

मन का तुलसी चौरा

 
चर्चित पत्रकार और लेखक एवं संसद सदस्य (राज्यसभा) तरुण विजय की पुस्तक ललित निबंधो के संकलन पर आधारित 'मन का तुलसी चौरा' पर रमेशचंद्र शाह के विचार- " देश का मन और जल दोनों गंदला गये हैं, दिल्ली में यमुना का आचमन तो दूर, स्पर्श तक नहीं किया जा सकता/ पीढ़ियों से अपने  धार्मिक संस्कार सुरक्षित रखे सूरीनाम और त्रिनिदाद के लोग काशी गये तो गन्दगी से भरी गलियाँ,..और ईश्वरोपासना की पहली ही सीढ़ी पर जाति के जुगुप्साजनक अहंकार का परिचय/ अब कोई विधर्मी नहीं, जो हमारी गंगा, जमुना या मंदिरों को गन्दा करने आते हों / यह काम हम खुद करते हैं"/ 

Book : Man Ka Tulasi Chaura
Author : Tarun Vijay
Publisher : Vani Prakashan
Price :
` 495
ISBN : 978-93-5072-227-5
Total Pages :  314
Size (Inches) : 5.75X8.75
Category  : 
Social Studies

पुस्तक के संदर्भ में.....
लेखक कहता है कि लेखनी के आँगन में आकर यथार्थ के खुरदरेपन का जो बहुधा मरणान्तक अहसास हुआ उसने हिन्दू-मुस्लिम दायरों के भीतर गहरे पैठे हुए पाखंड, आत्मवंचनाएँ, दोहरे चरित्र और पूज्य फरिश्तों के खड़िया वाले पाँव दिखा दिए और उन पर बेलाग लिखना भी तय करवा दिया/ हमारे झंडों के रंग जो भी हों पर अगर हमारे मन कलुषित, खिड़कियाँ बंद और इतिहासबोध संकीर्ण हैं तो संस्कृति और सभ्यता की खुदाई हो सकती है, रक्षा नहीं / धन और पद के अहं में डूबे महंतों के चाटुकारितासिक्त दरवाजों के खुलने और बंद होने का रिवाज समाज और देश तो तोड़ता ही है, जोड़ता नहीं / लेखक व्यंग्य कसते हुए कहता है कि गंगा विलुप्त प्राय:, यमुना तिरस्कृत, हिमालय प्रदूषित और हम चले हैं, विश्व बचाने- यह कैसे चल सकता है ? जब-जब मिर्चपुर हुए, भारत हारा / हर सोमनाथ विध्वंस के पीछे गज़नी से पहले, क.मा. मुंशी के ही शब्दों में, शिवराशि या शिवराशियों का ही योगदान रहा है और है/ खेमेबाजियों से परे जो वेदना और आक्रोश का भारतीय संसार है, वह इन्द्रधनुषी है, एक रंगीय नहीं / यूरोपीय सभ्यता के संदर्भ में लेखक पं. विद्यानिवास मिश्र की बात करता है कि ' यूरोपीय सभ्यता को सबसे गहरा प्रतिरोध भारत ने ही दिया, किन्तु विश्व में यूरोपीय संस्कृति को सर्वाधिक सहानुभूति के साथ समझने वाले भी भारतीय ही हुए /' 

लेखक के संदर्भ में....
पत्रकार, लेखक एवं संसद सदस्य (राज्यसभा) तरुण विजय देहरादून ( उत्तराखंड) के निवासी हैं/ विश्व के अधिकांश देशों में भ्रमण और जनजातीय क्षेत्रों में पाँच वर्ष कार्य किया / पाकिस्तान के साथ भारतीय संपादकों में सबसे पहले अमन के एजेंडा अभियान को शुरू किया/ हिन्दी और अंग्रेजी में अनेक पुस्तकों का लेखन तथा साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान के लिए अनेक पुरस्कार प्राप्त / कैलास-मानसरोवर यात्रा पर सचित्र पुस्तक ' साक्षात शिव से संवाद' का गुजराती, मराठी, बांग्ला, संस्कृत तथा अंग्रेजी में अनुवाद/