Friday, 30 March 2012

शहर और सिनेमा वाया दिल्ली


पाठकगण और लेखकगण आप हमारे युवा लेखक और दिल्ली विश्ववद्यालय में रिसर्च फैलो मिहिर पंड्या की पुस्तक  'शहर और सिनेमा वाया दिल्ली' के सन्दर्भ में deccanchronicle अखबार और thehindu अखबार में 27 मई 2012 की प्रकाशित साक्षात्कार और पुस्तक समीक्षा आप इस लिंक के माध्यम से पढ़ सकते हैं
वाणी प्रकाशन अपने युवा लेखक को बधाई देता है  इस पुस्तक से सम्बन्धित जानकारी आप http://vaniprakashanblog.blogspot.in/2012/03/blog-post_6970.html  और वाणी प्रकाशन की वेबसाईट http://vaniprakashan.in के माध्यम से प्राप्त का सकते हैं
पुस्तक के सन्दर्भ में हिंदुस्तान (पटना) 3 जून 2012 को  प्रकाशित मिहिर पंड्या का साक्षात्कार इस लिंक के माध्यम से आपके समक्ष प्रस्तुत हैhttps://www.facebook.com/photo.php?fbid=4174745530052&set=a.1344581497720.2049315.1326722260&type=1&theater
दैनिक भास्कर (रस रंग ) में,  10 जून 2012 को प्रकाशित मिहिर पंड्या का लेख 'सिनेमा में शहर' आप के समक्ष http://epaper.bhaskar.com/magazine/rasrang/211/10062012/mpcg/1/ प्रस्तुत है।


इतिहास के भग्नावशेष उसके प्यार की अनगढ़ कहानियाँ बन जाते हैं और कैम्पस की चौड़ी सड़कों के किनारे बनी पत्थर की सीढ़ियाँ इन्तजार की अनगिनत शामों की हमसफ़र / प्रेम के भिन्न रूप यहाँ मिलते हैं और किस तरह यह शहर प्रेम के सामने पड़ने पर अपने रंग बदलता है,देखा जाना चाहिए/

Book : SHAHAR AUR CINEMA : VIA DILLI
Publisher : Vani Prakashan
Write
r : Mihir Pandya
Price  : ` 495(HB)  
ISBN  : 978-93-5000-841-6
Total Pages :  286
Size( Inches) :  4X7

Category : (Cinema
)

पुस्तक के संदर्भ में....
इसी सत्ता के शहर में एक लड़की प्यार करती है/ असंभाव्य प्यार और अपने वर्जित कृत्य के लिए इस भीड़ भरे शहर से एक निर्जन कोना चुरा लेती है/ इतिहास के भग्नावशेष उसके प्यार की अनगढ़ कहानियाँ बन जाते हैं और कैम्पस की चौड़ी सड़कों के किनारे बनी पत्थर की सीढ़ियाँ इन्तजार की अनगिनत शामों की हमसफ़र/ इस महानगर राजधानी के हृहयस्थल पर घूमते हुए एक और लड़की ने कभी मुझे बताया था कि उसे यह भीड़ बहुत पसंद है/  जिसमें कोई किसी को नहीं पहचानता हो / जिसमें उसका खो जाना संभव हो / रोज़मर्रा का शहर / एक चोर की कथा के मार्फ़त आप इस बीहड़ के भीतर प्रविष्ट होते हैं और भिन्न कालों में भिन्न यारों की टोलियाँ आपको इस शहर में प्रेम और विद्रोह के असल मायने समझती हैं/ 
लेखक के संदर्भ में .....
 दिल्ली मिहिर पंड्या का जन्म 2 सितम्बर 1985 (उदयपुर) राजस्थान में हुआ  बी.ए. के दौरान खेल पर एक अखबारी कॉलम से लेखन की शुरुआत विश्वविद्यालय से एम.ए.,एम. फिल. । एम.ए.के दौरान गाँधी की सिनेमाई संरचना पर शोध कार्य वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय में जूनियर रिसर्च फैलो
अगर आप हिन्दी की पुस्तकों को खरीदना चाहते हैं, तो अब आप सीधे वाणी प्रकाशन के विक्रय विभाग से  पुस्तकें मंगवा सकते हैं, पुस्ताकादेश देने के माध्यमों की जानकारी निम्नलिखित है।


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