Tuesday, 2 August 2011

ज़ाहिदा हिना के कहानी संग्रह 'आख़िरी बूँद की खुशबू' की समीक्षा 'पुस्तक वार्ता' के जुलाई-अगस्त, २०११ अंक में





"मेरी कहानियां उतनी ही बेढब हैं. मुझे अपने बारे में न कोई खुशफहमी है, कोई दावा है. जैसे सुई की नोक से गोश्त में उतरी हुई फांस निकाली जाती है, फिर सुख की सांस ली जाती है, वैसे ही मैंने अपने जमीर और शऊर में चुभी हुई फांसन को कलम की नोक से निकाला है और कागज़ पर रख दिया है. अब अगर ये आपको चुभने लगें तो इसमें मेरा कोई दोष नहीं." 
- ज़ाहिदा हिना 

ज़ाहिदा हिना पाकिस्तान की प्रसिद्द उर्दू कथाकार, राजनीतिक टिप्पणीकार हैं. भारत के राष्ट्रपति द्वारा २००१ में उन्हें सार्क पुरस्कार से नवाजा गया. 

उनकी एक कहानी का अनुवाद स्वयं फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने किया. उनकी अनेक कहानियों का अनुवाद कई भारतीय भाषाओं में हुआ. 

वाणी प्रकाशन से अभी हाल में प्रकाशित ज़ाहिदा हिना के कहानी संग्रह 'आख़िरी बूँद की खुशबू' की समीक्षा महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय की द्विमासिक पत्रिका 'पुस्तक वार्ता' के जुलाई-अगस्त, २०११ अंक में प्रकाशित हुई है. 

समीक्षक हैं- केवल गोस्वामी. पूरी समीक्षा पढ़ना चाहते हैं तो इस लिंक < http://www.hindivishwa.org/pdf/publication/ank35.pdf > पर चटका लगाएं  और पृष्ठ संख्या 13 -14 पर पढ़ें. 

शुक्रिया.

वाणी प्रकाशन