Tuesday, 19 July 2011

पुनर्पाठ-2





वाणी प्रकाशन की क्लासिक’ उपन्यास ुनर्पाठ श्रृंखला में 16 जून 2011 को पहला संवाद यशपाल की दिव्या’ पर हुआ. उस सत्र में आप सभी की उपस्थिति सराहनीय रही. इतिहासवेत्ताउपन्यासकार भगवान सिंह ने उपन्यास को उधेड़ाफिर सँवारा और इस सम्पूर्ण चर्चा में महलों की राजनीति’ जैसे नये मुद्दे भी हाथ लगे. युवा लेखक व विचारक मित्रों ने नये-नये सवाल उठाएचर्चा हुईगर्म चर्चा हुई.

अब हम पुनर्पाठ का दूसरा सत्र लेकर आपके समक्ष उपस्थित हो रहे हैं, जो कि 27 जुलाई 2011, शाम 6:00 बजे पिछली बार की तरह कॉसरीना हॉल, हैबिटैट सेंटर में हजारी प्रसाद द्विवेदी के बहुचर्चित एतिहासिक उपन्यास बाणभट्ट की आत्मकथा’ पर होगा.

प्रो. नामवर सिंह के सान्निध्य व डॉ. राधावल्लभ त्रिपाठी के उपन्यास-परिचय के साथ बजरंग बिहारी तिवारी कार्यक्रम में संवाद करेंगे.

'आमंत्रण पत्र' और 'वाणी प्रकाशन समाचार' के जुलाई 2011 अंक में प्रकाशित 'पुनर्पाठ' कार्यक्रम का परिचय संलग्न है.

आप मित्रगण सहित सादर आमंत्रित हैं।

वाणी प्रकाशन

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