Monday, 29 August 2011

नयी किताबें...






आप इन पुस्तकों को 9136369644/011-23275710/011-23273167 पर काल कर मंगवा सकते हैं. 

अन्यथा, इसी ई-मेल पर पुस्तकादेश भेजने की कृपा करें. 
sales.vaniprakashan@gmail.com
vanisamachaar@gmail.com
vaniesamachaar@gmail.com

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Monday, 15 August 2011

वाणी प्रकाशन की प्रस्तुति. क्लासिक उपन्यास पुन:पाठ - 3 : 'गोदान ' : प्रेमचंद


हिंदी के क्लासिक उपन्यास 'गोदान' के प्रकाशन के पचहत्तरवें साल में 

वाणी प्रकाशन की प्रस्तुति 

क्लासिक उपन्यास  

पुन:पाठ - 3

'गोदान '
(प्रेमचंद)

सानिध्य: प्रो. मैनेजर पाण्डेय
उपन्यास  परिचय : प्रो. हरीश त्रिवेदी 
संवाद : डॉ. जितेन्द्र श्रीवास्तव   

दिनांक : 24 अगस्त 2011 
समय : 6 बजे 

स्थान :  इंडिया हेबिटाट सेंटर
कॉसरीना हॉल
नई दिल्ली.

आप सभी आमंत्रित हैं.
उपन्यास पढ़कर आएँ और गंभीर सवाल पूछें 
हम इस कार्यक्रम का फिल्मांकन करते हैं और पुस्तक के रूप में प्रकाशित करते हैं.  
गंभीर सवाल पूछनेवाले 5 विद्यार्थियों/शोधार्थियों को पाँच-पाँच सौ रुपये की प्रोत्साहन राशि डी जाएगी.      

शुक्रिया.
वाणी प्रकाशन,दिल्ली   


Tuesday, 9 August 2011

'तितिक्षा' का लोकार्पण


पिछले 7 अगस्त को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर एनेक्स, नयी दिल्ली में वाणी प्रकाशन से प्रकाशित मराठी
कवि माणिक मुंडे की काव्यकृति 'तितिक्षा' का लोकार्पण करते हुए बाएँ से श्री राजविंदर सिंह,
श्री डी. पी. त्रिपाठी, श्री अशोक वाजपेयी, श्री माणिक मुंडे, और डॉ. संजीव कुमार (दाएँ)


'तितिक्षा' के लोकार्पण कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक श्री अरुण माहेश्वरी.




वाणी प्रकाशन से प्रकाशित  मराठी कवि माणिक मुंडे की काव्यकृति 'तितिक्षा' के लोकार्पण उत्सव में बाएँ से श्री  डी. पी. त्रिपाठी, वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी, श्री माणिक मुंडे और अन्य.



Friday, 5 August 2011

सन 2005 में भारत सरकार द्वारा नोबेल पुरस्कार के लिए नामित हिंदी के प्रख्यात लेखक  
निर्मल वर्मा एक बड़े रचनाकार के साथ-साथ एक सधे हुए अनुवादक भी थे. अनुवाद को दूसरे 
दर्ज़े का काम मानने की परंपरा हिंदी ही नहीं विश्व की सभी भाषाओं में भी रही है पर अनुवादक 
जब निर्मल वर्मा जैसे गहन शब्द साधक हों और जिन्होंने जिन अनूदित रचनाओं का हर-एक 
अक्षर पूरे मनोयोग से अपनी भाषा में लिखा हो उन्हें दूसरे दर्ज़े का कर्म मानना कितना उचित है?

पिछले दिनों निर्मल वर्मा के द्वारा अनूदित दर्जन भर पुस्तकों को वाणी प्रकाशन ने पुनः प्रकाशित 
किया है. इनमें रूसी, चेक और रोमानियाई कथा-साहित्य हैं और चेक नाटक. इनमें से कई 
कृतियाँ आज विश्व साहित्य की धरोहर हैं. पेश है, वाणी प्रकाशन से प्रकाशित 
निर्मल वर्मा के अनूदित साहित्य की एक झलक :

रूसी उपन्यास :
 
  बचपन  
लियो टॉलस्टॉय
मूल्य : 200 रूपये  
 पराजय 
अलेक्सांद्र फेदयेव 
मूल्य : 425 रूपये  
रूसी कथा-साहित्य :
 ओलेस्या तथा अन्य कहानियाँ 
अलेक्सांद्र कुप्रीन 
मूल्य : 425 रूपये  
 रत्न-कंगन तथा अन्य कहानियाँ
अलेक्सांद्र कुप्रीन
मूल्य :425 रूपये 
चेक उपन्यास :
 बाहर और परे 
इर्शी फ्रीड 
मूल्य : 300 रूपये  
रोमियो जूलियट और अँधेरा
यान ओत्चेनाशेक
मूल्य : 395 रूपये  
चेक कथा-साहित्य :
 एमके : एक गाथा 
जोसेफ श्कवोरस्की
मूल्य : 200 रूपये  
 टिकट-संग्रह
कारेल चापेक 
मूल्य : 325 रूपये  
 खेल-खेल में 
चयन एवं अनुवाद : निर्मल वर्मा 
मूल्य : 250 रूपये 

रोमानियाई कथा-साहित्य :
झोंपड़ी वाले और अन्य कहानियाँ 
मिहाइल सादौवेन्यू
मूल्य : 250 रूपये   
चेक नाटक :

आर. यू. आर. 
कारेल चापेक
मूल्य : 250 रूपये

इन पुस्तकों को मंगाने के लिए संपर्क करें :
 
वाणी प्रकाशन
21-ए, दरियागंज, नयी दिल्ली-110002
फोन नंबर : 011-23273167, 23275710
E-MAIL : vaniprakashan@gmail.com

Tuesday, 2 August 2011

ज़ाहिदा हिना के कहानी संग्रह 'आख़िरी बूँद की खुशबू' की समीक्षा 'पुस्तक वार्ता' के जुलाई-अगस्त, २०११ अंक में





"मेरी कहानियां उतनी ही बेढब हैं. मुझे अपने बारे में न कोई खुशफहमी है, कोई दावा है. जैसे सुई की नोक से गोश्त में उतरी हुई फांस निकाली जाती है, फिर सुख की सांस ली जाती है, वैसे ही मैंने अपने जमीर और शऊर में चुभी हुई फांसन को कलम की नोक से निकाला है और कागज़ पर रख दिया है. अब अगर ये आपको चुभने लगें तो इसमें मेरा कोई दोष नहीं." 
- ज़ाहिदा हिना 

ज़ाहिदा हिना पाकिस्तान की प्रसिद्द उर्दू कथाकार, राजनीतिक टिप्पणीकार हैं. भारत के राष्ट्रपति द्वारा २००१ में उन्हें सार्क पुरस्कार से नवाजा गया. 

उनकी एक कहानी का अनुवाद स्वयं फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने किया. उनकी अनेक कहानियों का अनुवाद कई भारतीय भाषाओं में हुआ. 

वाणी प्रकाशन से अभी हाल में प्रकाशित ज़ाहिदा हिना के कहानी संग्रह 'आख़िरी बूँद की खुशबू' की समीक्षा महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय की द्विमासिक पत्रिका 'पुस्तक वार्ता' के जुलाई-अगस्त, २०११ अंक में प्रकाशित हुई है. 

समीक्षक हैं- केवल गोस्वामी. पूरी समीक्षा पढ़ना चाहते हैं तो इस लिंक < http://www.hindivishwa.org/pdf/publication/ank35.pdf > पर चटका लगाएं  और पृष्ठ संख्या 13 -14 पर पढ़ें. 

शुक्रिया.

वाणी प्रकाशन