Tuesday, 30 August 2016

Book Launch : Santvani by Dr. P.Jayaraman




पुस्तक लोकार्पण समारोह I


                                                                                                                                                      
                                                                                                                                                     


नालायिर दिव्य प्रबन्धम
तमिल भाषा के वैष्णव आषवार संतों का
चतुस्सहस्त्र दिव्य प्रबन्ध साहित्य 

देवनागरी व हिन्दी भाषा में
प्रस्तुतकर्ता
डॉ. पी. जयरामन
 सन्त वाणी-11 खण्ड 


आषवार व आण्डाल सन्तों के 4000 पदों का तमिल भाषा से
देवनागरी में लिप्यन्तरण व हिन्दी भाष्य डॉ. पी. जयरामन ने
आठ वर्षों के अथक प्रयास में पूर्ण किया है।
भक्ति की यह ऐतिहासिक धारा भारतीय आध्यात्मिक एकात्मकता का
प्रतिमान प्रस्तुत करती है। डॉ.पी.जयरामन भारत आये हैं।
सन्त वाणी के लिप्यन्तर व अनुवाद प्रक्रिया के ऐतिहासिक क्षणों
को साझा करने आप सादर आमन्त्रि हैं।


  कार्यक्रम में  


 अध्यक्ष  

 जे. वीर राघवन 
पूर्व निदेशक 
भारतीय विद्या भवन 

 मुख्य अतिथि  

 मृणाल पाण्डे 
वरिष्ठ लेखिका 

 वक्ता 
बलदेव वंशी
सन्त साहित्य वेशेषज्ञ


स्थान

लेक्चर हॉलइण्डिया इंटरनेशनल सेंटर
 मैक्सम्युलर मार्ग, नयी दिल्ली - 110003 


  दिन व समय : शुक्रवार, 2 सितम्बर 2016, सायं 6 : 00 बजे 

कार्यक्रम के आरम्भ में जलपान। 

विनीत 
अरुण माहेश्वरी 
9811053214 



Saturday, 27 August 2016

Book Launch - Media Ki Bhasha Leela by Ravikant, Author in conversation with Dr. Sanjeev & Anu Singh Chaudhary



नमस्कार!



प्रस्तुति 

************************************
मीडिया की भाषा-लीला
************************************

वाणी प्रकाशन से प्रकाशित

इतिहासकार, लेखक और अनुवादक 
रविकान्त 
 
 
की शोधपरक पुस्तक पर परिचर्चा 

सान्निध्य
डॉ.संजीव 
अनु सिंह चौधरी ​​

संचालन
अदिति माहेश्वरी-गोयल 


दिनांक  व समय 

बुधवार31 अगस्त 2016, सायं 6:00 बजे 

 स्थान  




 आप सादर आमन्त्रित हैं| 



 विनीत 
 वाणी प्रकाशन व ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर


Friday, 26 August 2016

ए के हंगल : ज़िंन्दगी में भरपूर शिरकत करता हुआ अभिनेता

----------------------------------------------------------------------------
ए के हंगल:ज़िंन्दगी में भरपूर शिरकत करता हुआ अभिनेता
----------------------------------------------------------------------------

फुरसत के क्षणों में हंगल साहब 

ए. के. हंगल जाने-माने सिने कलाकार रहे हैं। हालाँकि केवल सिनेमा में ही नहीं, बल्कि ज़िन्दगी के रंगमंच पर भी उन्होंने अलग-अलग समय में अलग-अलग भूमिकाएँ निभाई हैं। एक ऊँचे घराने से होते हुए भी शुरुआती दौर में पेशे से दर्जी का काम करने वाला आदमी एक सक्रिय स्वतन्त्रता सेनानी बनता है, बाद में रंगमंच और फिर सिनेमा में आकर अपनी प्रतिभा और कला का लोहा मनवाता है। 

सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें 'पद्मभूषण' से नवाजा गया 'पद्मभूषण' से सम्बंधित कुछ दुर्लभ तस्वीरें और ख़बरें:   

राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम से 'पद्मभूषण' प्राप्त करते हुए हंगल साहब  



ए के हंगल को 'पद्मभूषण' सम्मान ('द एसियन एज' में छपी खबर 


हंगल साहब को पद्मभूषण मिलने पर इप्टा द्वारा जारी शुभकामना सन्देश 

अपनी आत्मकथा 'मैं एक हरफ़नमौला' में हंगल साहब विस्तार से अपने बचपन की यादों के बारे में लिखते हैं, जेल की दीवारों के भीतर के अनुभवों के बारे में लिखते हैं, मुम्बई में अपने गर्दिश के दिनों को याद करते हैं, 'इप्टा' का रोमांचक सफर बयां करते हैं और सिनेमा की दिलचस्प यादों को साझा करते हैं। पूरी किताब को एक बड़ी फिल्म की पटकथा के रूप में भी पढ़ा जा सकता है।

शबाना आजमी और जावेद अख़्तर के साथ हंगल साहब 

 अपने मित्रों के साथ हंगल साहब 

हंगल साहब ने अट्ठानवे साल  की लम्बी उम्र पायी थी किसी महाकाव्य की तरह लगता हुआ उनका जीवन हमें आज भी प्रेरणा देता है हंगल साहब की तरह जीने का मतलब है जीवन की हर छोटी-बड़ी भूमिकाओं में शिरकत करना और ज़िन्दगी को भरपूर जीना उनके नब्बे वर्ष पूरे होने पर 'स्क्रीन' अखबार ने यह ख़ास फीचर प्रकाशित किया था: 


           'स्क्रीन' अखबार में प्रकाशित विशेष फीचर
'नमकहराम', 'बावर्ची', 'शोले', 'कोरा काग़ज़', 'शौकीन' और 'अवतार' जैसी फिल्मों से अपने संजीदा किरदार के लिए पहचाने जाने वाले हंगल साहब की पुण्यतिथि पर समस्त वाणी प्रकाशन परिवार की ओर से कृतज्ञ नमन!

हंगल साहब की आत्मकथा 'मैं एक हरफ़नमौला' के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

__________________________________
__________________________________


Thursday, 25 August 2016

तसलीमा नसरीन : स्त्रियों के हक़ में मुक्ति की आवाज़



-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
  तसलीमा नसरीन : स्त्रियों के हक़ में मुक्ति की आवाज़  
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------



तसलीमा नसरीन का जीवन संघर्षों का एक अनन्त सिलसिला है और उनका साहित्य उन तमाम संघर्षों की एक अन्तहीन दास्तान। अपने लेखन के जरिये उन्होंने संघर्ष, विद्रोह और मुक्ति की पुकार को एकाकार कर दिया है।

जीवन में जो कुछ भी वर्जित, घृणित और उपेक्षित है, तसलीमा अपने साहित्य में उन सबको एक उदात्त आयाम देकर प्रस्तुत करती हैं। तसलीमा को पढने के बाद पाठक अपने आप को एक वीभत्स यथार्थ के सामने पाता है और उसका नजरिया बदलने लगता है। तसलीमा फेमिनिज्म के बने-बनाए ढाँचों को तोड़कर हमारे सामने उसका एक अलग पाठ प्रस्तुत करती हैं।

तसलीमा के समूचे कथा-साहित्य और आत्मकथा-साहित्य में एक आवेग है और एक त्वरा है। चाहे वह 'लज्जा' हो, 'फेरा' हो, 'मेरे बचपन के दिन', 'उत्ताल हवा' या 'द्विखंडित' हो। तसलीमा औरत के हक़ में कुछ गद्य, कुछ पद्य भी लिखती हैं और कहती हैं कि 'औरत का कोई देश नहीं' होता। तसलीमा का लेखन एक हमेशा धधकते रहने वाली एक मशाल की तरह है जिसकी चिंगारियाँ स्त्री-मुक्ति की राहों को रौशन करती रहती हैं।
समस्त वाणी प्रकाशन परिवार की ओर से Tasleema Nasreen जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

_________________________________________
__________________________________________



Tuesday, 23 August 2016

उदयपुर में स्मिता पारिख की किताब 'नज़्में इन्तज़ार की' का लोकार्पण



 उदयपुर में स्मिता पारिख की किताब 'नज़्में इन्तज़ार की' का लोकार्पण 

________________________________________________________________________________________
कार्यक्रम की रिपोर्ट दैनिक भास्कर, उदयपुर ने जारी की है 
________________________________________________________________________________________

समाचार देखने हेतु इस लिंक पर क्लिक करें -
dainikbhaskar.com




श्री गोपाललाल पानेरी स्मृति स्मृति संस्था, उदयपुर और वाणी प्रकाशन की संयुक्त पहल पर दिनांक 21 अगस्त (रविवार) को पुस्तक लोकार्पण और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस आयोजन में वाणी प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तक 'नज़्में इन्तज़ार की' का लोकार्पण किया गया और श्री भानुकुमार शास्त्री को शिखर पुरुष सम्मान तथा श्री चन्द्रशेखर शर्मा को अंकुर साहित्य सम्मान प्रदान किया गया।
***
श्री लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे जबकि एमपीयूएटी के कुलपति प्रो. उमाशंकर शर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में श्री दिनेश भट्ट, श्री राजेन्द्र कुमार पानेरी और विजेन्द्र कुमार सांघी तथा आकाशवाणी के पूर्व डायरेक्टर माणिक आर्य मौजूद थे। वाणी प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक श्री अरुण माहेश्वरी की विशिष्ट उपस्थिति थी।
***
श्री अरुण माहेश्वरी ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज के युवा लेखक सीधी सपाट बात कहना चाहते हैं। एक प्रकाशक की दृष्टि से जब हम महादेवी, निराला और केदारनाथ सिंह जैसे दिग्गज कवियों की रचनाएँ प्रकाशित करते हैं तो आज की युवा पीढ़ी की रचनाओं को प्रकाशित करना भी हमारा कर्तव्य है।
***
Smita Parikh ने बताया कि 'नज़्में इंतज़ार कीमें प्रेम के बारे में लिखा गया है। इसमें संवेदना है तो संदेश भी। मैंने बेबाक तरीके से अपनी कविताओं को अभिव्यक्त किया है।

_____________________________________
_____________________________________

वाणी प्रकाशन समाचार - अगस्त 2016